काव्यशाला पृष्ठ 6 | मातृभाषा - माँ भारती का श्रृंगार | Hindi Poems

कालजयी कविताएँ

हिंदी साहित्य की कालजयी कविताओं का संकलन





गोपालदास ‘नीरज’

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं

गोपालदास ‘नीरज’

वीर रस | आधुनिक काल

 13771  0

गोपालदास ‘नीरज’

धरा को उठाओ

गोपालदास ‘नीरज’

वीर रस | आधुनिक काल

 4827  0

मीराबाई

तुम बिन नैण दुखारा 

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2523  0

शिवमंगल सिंह 'सुमन'

सूनी साँझ

शिवमंगल सिंह 'सुमन'

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1993  0

प्रदीप

आज हिमालय की चोटी से

प्रदीप

वीर रस | आधुनिक काल

 7253  0

हरिवंश राय बच्चन

त्राहि त्राहि कर उठता जीवन

हरिवंश राय बच्चन

करुण रस | आधुनिक काल

 2491  0

महादेवी वर्मा

अश्रु यह पानी नहीं है

महादेवी वर्मा

अद्भुत रस | आधुनिक काल

 809  0

आनंद बख़्शी

हुस्न के लाखों रंग

आनंद बख़्शी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1907  0

भारतेंदु हरिश्चंद्र

ग़ज़ब है सुरम

भारतेंदु हरिश्चंद्र

अद्भुत रस | आधुनिक काल

 789  0

नागार्जुन

गुलाबी चूड़ियाँ

नागार्जुन

करुण रस | आधुनिक काल

 1813  0

जगनिक

आल्हा खण्ड

जगनिक

रौद्र रस | रीतिकाल

 5509  0

धर्मवीर भारती

प्रार्थना की कड़ी

धर्मवीर भारती

शांत रस | आधुनिक काल

 715  0

गोपाल सिंह नेपाली

बाबुल तुम बगिया के तरुवर

गोपाल सिंह नेपाली

शांत रस | आधुनिक काल

 773  0

शिवमंगल सिंह 'सुमन'

मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ 

शिवमंगल सिंह 'सुमन'

वीर रस | आधुनिक काल

 4463  1

रामचंद्र शुक्ल

मनोहर छटा

रामचंद्र शुक्ल

अद्भुत रस | आधुनिक काल

 686  0

द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

उठो धरा के अमर सपूतो 

द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

वीर रस | आधुनिक काल

 9018  1

प्रदीप

अमृत और ज़हर दोनों हैं सागर में

प्रदीप

अद्भुत रस | आधुनिक काल

 799  0

मीराबाई

नैना निपट बंकट छबि अटके

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 1531  0

तुलसीदास

केशव, कहि न जाइ का कहिये

तुलसीदास

अद्भुत रस | भक्तिकाल

 1272  0

नरेन्द्र शर्मा

तुम रत्न-दीप की रूप-शिखा

नरेन्द्र शर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2063  0

देव

झहरि झहरि झीनी बूँद है परति मानों

देव

शृंगार रस | रीतिकाल

 1121  0

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'&

हमारा देश

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'&

अद्भुत रस | आधुनिक काल

 784  0

सोम ठाकुर

परवाह क्यों करें

सोम ठाकुर

अद्भुत रस | आधुनिक काल

 729  0

हरिवंश राय बच्चन

क्षण भर को क्यों प्यार किया था?

हरिवंश राय बच्चन

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2335  0

उर्मिलेश

आज है, कल हुई

उर्मिलेश

शांत रस | आधुनिक काल

 739  0

शिवमंगल सिंह 'सुमन'

सहमते स्वर-2 

शिवमंगल सिंह 'सुमन'

अद्भुत रस | आधुनिक काल

 748  0

रघुवीर सहाय

आनेवाला कल 

रघुवीर सहाय

अद्भुत रस | आधुनिक काल

 787  0

भवानी प्रसाद मिश्र

ऐसा हो जाता है

भवानी प्रसाद मिश्र

अद्भुत रस | आधुनिक काल

 730  0

प्रभाकर माचवे

माता की मृत्यु पर

प्रभाकर माचवे

करुण रस | आधुनिक काल

 2161  0

प्रदीप

कभी धूप तो कभी छाँव 

प्रदीप

शांत रस | आधुनिक काल

 774  0




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