हमारे प्रिय प्रधानाचार्य  SHUBHAM KALA


हमारे प्रिय प्रधानाचार्य

SHUBHAM KALA

नहीं कोई खास बात मेरी कलम और शब्दों में,
फिर क्यों ये आज कुछ लिखने को व्याकुल हो रहे हैं ?
यह आशीर्वाद है आपसे प्राप्त हिंदी लेखन के शिक्षण का,
जो इस शिष्य को छोटी सी गुरुदक्षिणा प्रस्तुत करने के लिए उत्साहित कर रहे हैं।
 

कक्षा में आपका शालीनता से हिंदी पाठ करना,
वो शब्द आज भी कानों में गूँज रहे हैं,
पत्र-लेखन, रिपोर्ट, निबंध आदि में सबको निपुण बनाना,
जिनका उपयोग हम आज भी कर रहे हैं।
 

बोर्ड परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परीक्षाफल एवं दीनदयाल पुरस्कार,
साथ ही छात्र मेरिट में बजी मार रहे हैं,
संस्कृत प्रतियोगिता में राज्य स्तर पर प्रथम पुरुस्कार पाकर,
विद्यालय परिवार से जुड़े सभी लोग गर्व महसूस कर रहे हैं।
 

विद्यालय के प्रथम वार्षिकोत्सव का श्रेय भी जाता आपको,
जिलाधिकारी महोदय भी जिसमें शिरकत कर रहे हैं,
जी आई सी जयंती को घोषित कर सर्वश्रेष्ठ विद्यालय,
आपके स्वर्णिम कार्यकाल की और इशारा कर रहे हैं।
 

एक कुशल प्रशासक के रूप में आपकी उपस्थिति अपने मायने रखती थी,
अब आपके अनुपस्थिति के दर्द को सब महसूस कर रहे हैं,
यह आपकी कड़ी मेहनत, कर्तव्यनिष्ठा एवं प्रतिबद्धता का परिणाम है,
जिस मुकाम पर आज हम जी आई सी जयंती को देख रहे हैं।
 

परिवार की तरह पला पोसा जिस विद्यालय को,
आज छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं,
न चाहते हुए भी दिल में पत्थर रख कर,
सेवानिवृति के इस दस्तूर को निभा रहे हैं।
 

आपके मृदु भाषी व्यक्तित्व एवं कुशल नेतृत्व का कोई और विकल्प नहीं,
निर्जीव पत्थर की दीवारें और शहतूत के पेड़ आपको रोक रहे हैं,
आपके पदचिन्हों पर चलकर आगामी वर्षो में विद्यालय की प्रगति यूँ ही जारी रहे,
यही सपना समस्त अभिभावक अपनी आँखों में सजा रहे हैं।
 

चित-परिचित और परिजनों के साथ ही समस्त ग्रामीणों का जान सैलाब,
इस अवसर को यादगार बनाने हेतु एकत्रित हो रहे हैं,
आँखों में नमी, होंठों पर मुस्कान और खामोश लबों का इशारा है,
हमारे प्रिय प्रधानाचार्य जी की विदाई है, जो हमारी शान रहे हैं।
 

ख़ुशी-गम की मिली-जुली भावनाओं के साथ शुभकामना है सेवानिवृति की,
कल से आप नया जीवन शुरू करने जा रहे हैं,
सवस्थ, निरोग रहें आप जीवन भर और हर अभिलाषा आपकी पूर्ण हो,
हाथ जोड़ यही प्रार्थना ईश्वर से हम कर रहे हैं।

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