यमुना को बचाओ  Puneet Kumar

यमुना को बचाओ

Puneet Kumar

हिमालय के कलिंद पर्वत से निकलकर
मैं मदमस्त बहती जा रही थी,
मनुष्य द्वारा की गई हर भूल को
मैं सहती जा रही थी,
और इस कूड़े की चादर
ओढ़ कर मैं रोती जा रही थी।
 

बस अब बहुत हुआ,
मेरे इस पाक आँचल को
और गन्दा मत करो।
हे मानव तुम यमुना में
कूड़ा फेकना बस अब बंद करो।
 

करोगे यमुना की सफाई
तो भारत का कण कण रोशन होगा,
गन्दा नाला बन गई ये यमुना का
फिर से देवियों की भाँति पूजन होगा।
 

आओ हम सब शपथ लें
कि यमुना को मिलकर साफ़ करेंगे,
काले पानी के इस ढेर को फिर से
पवित्रता के रंगों से भर देंगे।

अपने विचार साझा करें




0
ने पसंद किया
46
बार देखा गया

पसंद करें


  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 7534072808
Mail : info@maatribhasha.com