हिंदी से फिर भारत के बच्चे जुड़ जाएँगे  Madhusudan Sharma

हिंदी से फिर भारत के बच्चे जुड़ जाएँगे

Madhusudan Sharma

राष्ट्र की भाषा है हिंदी,
हम कहते "माथे की बिंदी",
पर जब भी आता है हिंदी-दिवस,
यह हमें सोचने करता है विवश।
 

क्या सच में यह राष्ट्रभाषा बन पाई है,
या अपने ही घर हुई पराई है?
हाँ, अपने बूते यह कर सकती है अपना विकास,
किन्तु इससे क्या यह जा सकती है हर मन के पास?
 

राष्ट्रभाषा तो होती है जन-जन को जोड़ने वाली,
न कि होती है दिल को तोड़ने वाली!
इसके लिए ज़रूरी है हर भारतवासी हिंदी बोल सके,
और मिलें जब भी एक दूजे से, अपना दिल कुछ खोल सके।
 

ग्लानि होती है जब हिंदी अपने ही घर सहती वार,
सच्चाई बस इतनी है यह राजनीति का हुई शिकार।
मैं कहता हूँ हिंदी को अब करो ज़रूरी मिडिल क्लास तक,
मिडिल बाद ही अंग्रेजी हो पठन जरूरी ठीक पूर्ववत।
 

इसके लिए ज़रूरी है हम गढ़ें नया पावन परिवेश,
सभी राज्य के चिंतक मिलकर सोचें, दें घर-घर सन्देश।
पहली कक्षा से मिडिल क्लास तक जब बच्चे हिंदी पढ़ जाएँगे,
हिंदी से ही फिर भारत के बच्चे -बच्चे जुड़ जाएँगे।

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