पैगाम -ए-मोहब्बत  Tilak raj saxena

पैगाम -ए-मोहब्बत

Tilak raj saxena

कोई रूठा हुआ है मुझसे
उसे कैसे मनाऊँ मैं,
वो दिल के पास है कितना
उसे कैसे बताऊँ मैं।
 

उदास होता है जब वो
तो दिल मेरा रोता है,
इन आँखों से बहते अश्क
उसे कैसे दिखाऊँ मैं।
 

मोहब्बत उसको ही नहीं
मुझको भी है उससे,
मगर इस बात का यकीं
उसे कैसे दिलाऊँ मैं।
 

मिलना है अगर किस्मत में
मिल ही जाएँगे हम दोनों,
दुनिया है बड़ी ज़ालिम
उसे कैसे समझाऊँ मैं।
 

सिसकते हम भी रातों में
तकिये पे सर रखकर,
अब हर बात का ऐतबार
उसे कैसे कराऊँ मैं।
 

परेशां कितना करता है
वो अक्सर ख्वाबों में मुझको,
कहते लाज आती है
लबों पे कैसे लाऊँ मैं।
 

हर रात चाँद से कहती हूँ
मेरा पैगाम दे तुझको,
नहीं सुनता अगर चाँद
तो तुझे कैसे सुनाऊँ मैं।

अपने विचार साझा करें




0
ने पसंद किया
43
बार देखा गया

पसंद करें


  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 7534072808
Mail : info@maatribhasha.com