हैरानगी-ए-इश्क़  Tilak raj saxena

हैरानगी-ए-इश्क़

Tilak raj saxena

खुदा भी खुद हैरान था
ताक़त मेरे इश्क़ की देख कर
कि मेरे दुश्मन भी
सज़दा कर रहे थे खुदा का
तुझको मुझसे मिलाने के लिए।
 

फूलों में भर रही थी
महक मेरे प्यार की इस कदर
कि वो भी बेहाल थे
खिल कर बिख़र जाने के लिए।
 

हैरान मैं भी कम ना था
कायनात के ज़र्रों का रूख देख कर
कितने बेक़रार थे वो
तुझे मेरा हमदम बनाने के लिए।

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