उलझन  Tilak raj saxena

उलझन

Tilak raj saxena

हमें कहना नहीं आया
वो कभी कह नहीं पाए,
रहे दोनों उलझन में
इशारे ना वो समझ पाए
ना हम समझ पाए।
 

चाहतों के गहरे भंवर में
डूबे थे हम दोनों,
धड़कते थे दिल दोनों के
एक-दूजे की मुहब्बत में।
 

खता बस इतनी हो गई
कभी दिलबर से अपने
राज़-ए-दिल खुल कर
ना जाहिर वो कर पाए
ना जाहिर हम कर पाए।
 

वक्त गुज़र गया यूँ ही
ना चाहतें बयां हुई,
आखिर एक दिन
रास्ते दोनों के हुए अलग
और मुहब्बत जुदा हुई,
गिला फिर कोई
ना वो हमसे कर पाए
ना हम उनसे कर पाए।
 

उस वक्त आँखें दोनों की
अश्कों में डूबीं थीं इतनी,
कि शक्ल एक दूजे की
हम फिर देख नहीं पाए।

अपने विचार साझा करें




0
ने पसंद किया
157
बार देखा गया

पसंद करें


  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 7534072808
Mail : info@maatribhasha.com