मानना कभी न हार  ANIL Mishra Prahari

मानना कभी न हार

ANIL Mishra Prahari

वक्त राह रोक दे
या असीम शोक दे,
रुद्ध जो बहे पवन
शत्रु दे असह जलन।
पंथ दे कलुष अपार
मानना कभी न हार।
 

आँधियों में पर गया
नीड़ भी बिखर गया,
बाग बदहवास हो
कली- कली उदास हो।
विघ्न हो खड़ा कतार
मानना कभी न हार।
 

क्या हुआ गिरे अगर?
हौसला रहे , जिगर,
नवीन फिर प्रयास हो
बढ़ो, नहीं हताश हो।
गिरो-उठो हजार - बार
मानना कभी न हार।

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