ज़रूरत है  Neeraj Kumar

ज़रूरत है

Neeraj Kumar

एक अँधेरा सा है ज़िन्दगी में, कहीं रोशनी की ज़रूरत है;
कहीं रोशनी है जब हर जगह, तो एक नज़र कि ज़रूरत है।
 

कोई प्यासा बैठा है उधर, तो उसे पानी की ज़रूरत है;
पानी है अगर जिसके पास, उसे कदर करने की ज़रूरत है।
 

दो लोग जो अभी फुरसत में हैं, उन्हें चंद बातों की ज़रूरत है;
अगर बातों का सिलसिला है जहाँ, तो बस दो पल की ज़रूरत है।
 

अगर रो रही हैं आँखें हरदम, उन्हें एक मुस्कुराहट की ज़रूरत है;
जो मुस्कुरा रहा है जिसके लिए, बस उसे उसकी आहट की ज़रूरत है।
 

अगर रूठ गया है तुमसे कोई, उसे दो बूंद प्यार की ज़रूरत है;
समाया है प्यार का सागर जिसमें, तो किसी के साथ उसे बाँटने की ज़रूरत है।
 

आया है कोई दुनिया में अगर, अपनों से उसे बधाई की ज़रूरत है;
रुक गई है अगर साँसें उसकी, तो अपनों से ही अंतिम विदाई की ज़रूरत है।

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