अनमोल रिश्ते  Rakesh Rajgiriyar

अनमोल रिश्ते

Rakesh Rajgiriyar

उठ न माँ
और कितना रुलाएगी,
माँ, सुनती हो
कह रही हूँ मैं तुमसे,
थक गई हूँ,
तनिक आराम तो कर लेने दो,
दम फूल रहा है मेरा
दो घूँट तो पानी पी लेने दो,
ऐसी भी क्या जिद है
नराजगी की,
माँ, बता न
क्यों तुम हमसे रूठी हो,
बोल न, क्या डर है तुझे,
क्या तू भी छोड़ जाएगी,
किसकी गोद में खेलूँगी,
कौन लोरियाँ सुनाएगी,
माँ बोल न,
भैया और पापा भी क्यों नहीं उठे हैं,
क्या तेरी तरह वो दोनों भी रूठे हैं?
कौन झुलाएगी झूला
कौन पकड़ेगी हाथ,
तेरे जाने के बाद क्या मैं भी
हो जाऊँगी अनाथ?
कैसे रह पाऊँगी मैं
इन गिद्धों से बच कर,
लज्जा नहीं आती है जिन्हें
कफ़न भी चुराने से,
क्या छोड़ देंगे मुझे निर्भया बनाने से,
तू ही तो साथ देती थी,
बोल न माँ,
उठ न, कितना तू सोती है,
कितना मुझे रुलाएगी,
चल न मुझे भूख लगी है
कुछ तो बना लेने दे।

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