मेरी बहना  विकास वर्मा

मेरी बहना

विकास वर्मा

जग-दीप मंदिर में, बहना हमारी है,
जीवन-सारोवर में चाँद सी प्यारी है।
प्रीति रहता मन सदा मेरी बहना का,
कोमल सी पुष्प जग बहना सारी है।
 

भ्राता के इस मधुरम जग-दीपक में
मेरी बहना ही पल-पल विहारी है,
पुष्प-मन की मातृत्व मधुर-बेला में,
बहना ही प्यारी है, बहना ही प्यारी है।
 

बचपन की वो अँगड़ाई हमें न्यारी है,
जहाँ खिले सखा रूपी बहना सारी है,
लड़ते, बिलखते, खेलते जहाँ में हम,
पर बहना का खेल ही सबसे प्यारी है।
 

याद आती है जब, मेरी बहना रोती है
बचपन की बेला, करुणमय भिगोती है।
बाल-बेला में जब मारे हम अनुजा को,
रोष न करती मेरी बहना रोती है।
 

चले मतवाला जब जीवन संगनी ढूँढने
मिले यही पर आँसू बहार सम नारी हैं,
विकट सदा में पल-पल साथ देती जो
बहना ही प्यारी है, बहना ही प्यारी है।
 

मुझे छोड़ जाती जब वो नए सफ़र में,
विकल धरा पर नयन आँसू बरसती है,
करूण वेग मोहे भर जाता तन-तन,
जब प्यारी बहना इस जग बिछड़ती है।
 

व्रतिनी का प्रेम मुझे पल-पल प्यारी है,
देती सदैव संसार वो, मातृ-प्रेम सारी है।
मन की कोमलता में खिले अनुजा मेरी
भ्राता का सर्वस्व जहाँ, बहना प्यारी है।

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