अंगना भयो अयोध्या  Dr Gunjan Rajput

अंगना भयो अयोध्या

Dr Gunjan Rajput

मेरो आंगनों भयो अयोध्या मनहर भई बसुंधरा,
दिये कि लौ के उजियारे ते आँगन लगे भरा-भरा।
 

मर्यादा कौ पाठ ना आज हमें पढावै,
हम तो लल्ला के वंशज हैं दो टूक में बात सुनावै।
 

सबके अब मैं दस मौह जानू, अब तो सबरे मंत्रा को पहचानु,
सिख मुझे हर कोई देगो, अब मैं मौन न रहना ठानु।
 

आज लल्ला घर आवेंगे देहरी तो सजाऊ मैं,
सूना ना हो चौबारो मेरो खूब सोर मचाऊं मैं।
 

ऐसो पर्ब मै रोज़ मनाऊ, बालकन पे पटाके बजवाऊ,
सौ रावण पस्त कर आऊ, ऐसी कृपा करो कौसल्या सुत मौपे,
हर दिन मैय्या का हनुमन बन जाऊं।

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