मणिपुर  Dr Gaurav Awasthi

मणिपुर

Dr Gaurav Awasthi

क्या हुआ मनुष्य को, क्या हुआ समाज को
आज नग्न कर रहा वो देवी सी हर नारी को।
हो गयी हद क्रूरता की हो गया अधि से अधिक
भूल बैठा वो उस माँ को जिसने जना क्रूर को।
 

क्यों हुआ है क्या हुआ है सोचने का समय नहीं,
जो हुआ गलत हुआ है सोचने का समय यही।
करके गलत क्रूर आज खोज रहा न्याय को,
न्याय है-अपराधी को दंड मिले यादगार।
 

काँप जाएँ सभी अपराधी, न हो कभी अपराध,
ऐसा दंड न्यायपालिका दे, न्याय पर भरोसा जगे।
न हो ऐसा फिर कभी न हो स्त्री शर्मशार,
स्त्री है जो इस धरा को नव रूप देती है।
 

स्त्री है जो नव जीवन को धरती पर जन्म देती है,
आज उस माँ-बहन को होना पड़ रहा शर्मशार।
डूब मरो ए भारतवासी जो न उठा पाओ आवाज़,
जो अपराध किये हैं उनको कठोर दंड अब दिलवाओ।
 

दंड ऐसा दीजिये कल न हो कोई देवी शर्मशार,
हे भारत की न्यायपालिका रखने स्त्री का सम्मान
लेना होगा तुमको निर्णय जिससे न्याय बने महान।
फिर न कोई निर्बल स्त्री, वहसी का शिकार बने,
दंड ऐसा दीजिये जो स्त्री मे साहस भरे
और दुराचारी को दुराचार से दूर करे।

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