कुँअर बेचैन | मातृभाषा - माँ भारती का श्रृंगार

कुँअर बेचैन

जीवन परिचय

कुँअर बेचैन ग़ज़ल लिखने वालों में ताज़े और सजग रचनाकारों में से हैं । उन्होंने आधुनिक ग़ज़ल को समकालीन जामा पहनाते हुए आम आदमी के दैनिक जीवन से जोड़ा है । यही कारण है कि वे नीरज के बाद मंच पर सराहे जाने वाले कवियों में अग्रगण्य हैं । उन्होंने गीतों में भी इसी परंपरा को कायम रखा है । वे न केवल पढ़े और सुने जाते हैं वरन कैसेटों की दुनिया में भी खूब लोकप्रिय हैं। 

सात गीत संग्रह, बारह ग़ज़ल संग्रह, दो कविता संग्रह, एक महाकाव्य तथा एक उपन्यास के रचयिता कुँवर बेचैन ने 'ग़ज़ल का व्याकरण' नामक ग़ज़ल की संरचना समझाने वाली एक अति महत्वपूर्ण पुस्तक भी लिखी है। 

उन्होंने अनेक बार विदेश यात्राएँ की हैं और अनेक महत्वपूर्ण संस्थानों के साहित्य सम्मानों द्वारा सम्मानित हुए हैं ।

लेखन शैली

सात गीत संग्रह, बारह ग़ज़ल संग्रह, दो कविता संग्रह, एक महाकाव्य तथा एक उपन्यास के रचयिता कुँवर बेचैन ने 'ग़ज़ल का व्याकरण' नामक ग़ज़ल की संरचना समझाने वाली एक अति महत्वपूर्ण पुस्तक भी लिखी है। 

प्रमुख कृतियाँ
क्रम संख्या कविता का नाम रस लिंक
1

जिस मृग पर कस्तूरी है

अद्भुत रस
2

प्यासे होंठों से

शांत रस
3

दो दिलों के दरमियाँ 

शांत रस
4

ज़िन्दगी

करुण रस
5

सोख न लेना पानी !

अद्भुत रस
6

अंतर

अद्भुत रस
7

दोनों ही पक्ष आए हैं

वीर रस
8

आदमी

शांत रस
9

चल ततइया !!

अद्भुत रस
10

कुछ काले कोट कचहरी के

अद्भुत रस
11

लौट आ रे !

अद्भुत रस
12

गुलाब हम,गुलाब तुम

शांत रस

  परिचय

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