गजानन माधव 'मुक्तिबोध' | मातृभाषा - माँ भारती का श्रृंगार

गजानन माधव 'मुक्तिबोध'

जीवन परिचय

'मुक्तिबोध' जी का जन्म श्यौपुर, ग्वालियर में हुआ। नागपुर विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए. किया तथा आजीवन साहित्य-सृजन और पत्रकारिता से जुड़े रहे। मुक्तिबोध अपनी लम्बी कविताओं के लिए प्रसिध्द हैं। इनकी कविता में जीवन के प्रति विषाद और आक्रोश है। मुख्य संग्रह हैं : 'चांद का मुंह टेढा है' तथा 'भूरी-भूरी खाक धूल'। ये काव्य में नए स्वर के प्रवर्तक तथा मौलिक चिंतक हैं। इन्होंने निबंध, कहानियां तथा समीक्षाएं भी लिखी हैं। समस्त रचनाएं 'मुक्तिबोध रचनावली (6 खण्ड) में प्रकाशित हैं।

लेखन शैली

इनकी कविता में जीवन के प्रति विषाद और आक्रोश है।

प्रमुख कृतियाँ
क्रम संख्या कविता का नाम रस लिंक
1

सहर्ष स्वीकारा है

अद्भुत रस
2

विचार आते हैं

अद्भुत रस
3

ब्रह्मराक्षस

अद्भुत रस
4

पूंजीवादी समाज के प्रति

अद्भुत रस
5

मेरे जीवन की

अद्भुत रस
6

कल और आज

अद्भुत रस
7

चाहिए मुझे मेरा असंग बबूल पन

अद्भुत रस
8

बहुत दिनों से

अद्भुत रस
9

मृत्यु और कवि

अद्भुत रस
10

बेचैन चील

अद्भुत रस
11

मुझे कदम-कदम पर

शांत रस
12

जब दुपहरी ज़िन्दगी पर

अद्भुत रस
13

भूल-ग़लती

अद्भुत रस
14

रात, चलते हैं अकेले ही सितारे

अद्भुत रस
15

दिमाग़ी गुहान्धकार का ओरांग उटांग

अद्भुत रस
16

नाश देवता

शांत रस
17

मैं उनका ही होता

अद्भुत रस
18

मैं तुम लोगों से इतना दूर हूँ

अद्भुत रस

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