नया साल मुबारक़ हर हाल
नये साल का इस्तक़बाल करते हैं,
पुरानी यादों को भी बहाल करते हैं,
गये साल के ग़मों को रूख़सत करके,
ज़िन्दगी को चलो खुशहाल करते हैं!
वाह! गुज़रा ज़माना भी क्या ज़माना था,
कच्चे घर थे, मगर सबका ठिकाना था,
साल द़र साल हमनें साथ गुज़ारे हैं,
सफर यादों का वो हर दिन सुहाना था!
नया नौसिखिया, पुराने कमाल करते हैं,
पुरानी यादों को चलो बहाल करते हैं!
नये साल से तो नई उम्मीद़ें काफी है,
दिल में रहीं अधूरी हसरतें बाक़ी हैं,
देखें क्या निहाल करती है क़िस्मत,
चाह ये हमारी, मर्ज़ी अल्लाह की है!
दुआओं का सबकी ख्याल करते हैं,
नये साल का इस्तक़बाल करते हैं!