चेतावनी  Vivek Tariyal

चेतावनी

Vivek Tariyal

रात की हो कालिमा या दिन का हो अँधेरा,
लोगों की कुंठित सोच ने हर क्षण तुझे है घेरा।


काल को निमंत्रण दे रहे ये अधर्मी, नीच, पापी,
तुझ संग ऐसा करते जिनकी रूह तक न काँपी।
 

कदाचित, यह जानते नहीं, कि तू परम शक्तिमान है,
असीम शक्ति का केंद्र है तू, सृजन का तुझे वरदान है।
 

जहाँ तुझमे कोमलता है, रूप और श्रृंगार है,
वहीं तुझमे धैर्य के संग, सृजन और संहार है।
 

अपने झूठे पौरुष पर कब तक यूँ इठलाएगा ?
घर जाकर अपनी जननी को कैसे मुँह दिखाएगा?
 

क्या बोलेगा उससे, कैसा नाम कमाकर आया है?
उसके दिए संस्कारों की बलि चढ़ा कर लाया है ?
 

अरे मूर्ख! मत दे चुनौती उसे, जो है धैर्य की प्रतिमा जीवंत,
उसके भीतर बसती है माँ चंडी जो कर देगी तेरा अंत।

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