एक वैलेंटाइन ऐसा भी  RATNA PANDEY

एक वैलेंटाइन ऐसा भी

RATNA PANDEY

सुबह सुबह वह आए, पेशानी पर हाथ फिराए,
भीगी पलकों से उन्हें उठाए, झूठी हंसी चेहरे पर लाए,
गम अपना दिल में छुपाए, हाथों से अपने चश्मा पहनाए,
देकर सहारा अपनी बांहों का, नित्य की दिनचर्या निपटाए।
 

जिन आँखों में पहले मस्ती थी, अब ढ़लती पलकों में है प्यार भरा,
जीवन भर साथ निभाने का जो वादा था, अब वह पूरा हो चला।
नहीं गिफ्ट थी हाथों में कोई, दवाईयों से भरा अब डब्बा था,
रुकती चलती साँसों में, प्यार भरा गुलदस्ता था,
साथ बैठते साथ घूमते, यह भी वक़्त सुनहरा था।
चेहरे की झुर्रियों से लिपटा, भविष्य की चिंता का मेला था,
कौन बचेगा तन्हा जग में, इस डर ने दोनों को घेरा था,
भगवान से थी बस यही प्रार्थना, जब बुलाना दोनों को साथ बुलाना।
 

कैलेन्डर पर जब नज़र गई, तब वैलेंटाइन डे फिर याद आया,
जाकर अपने बागीचे में लाल गुलाब वह ले आए,
स्नेह और प्यार से लिपटा फूल, उनके हाथों में थमाए,
पेशानी का चुम्बन लेकर, बीते लम्हे याद दिलाए,
बीत गई जवानी एक दूजे के साथ, अब वृद्धावस्था के दिन थे आए,
पल दो पल का साथ नहीं यह, जीवन भर साथ निभाना है,
ऐसा होता है सच्चा वैलेंटाइन, यह बात सभी को समझाना है,
यह बात सभी को समझाना है।

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