आँसू  RATNA PANDEY


आँसू

RATNA PANDEY

नदियों से नहीं बहता, समन्दर में नहीं रहता,
किन्तु समुद्र की गहराई से अधिक गहराई है मेरी।
इन्सान की पीड़ा को आँखों से दर्शाता हूँ,
इन्सान के अंदर बसता हूँ,
छुपकर पर्दे के पीछे पलता हूँ।
उम्र मेरी मुझे ज्ञात नहीं, शायद अमर हूँ,
आदिकाल से ही जीवन के संग हूँ।
 

नहीं करता भेदभाव अमीरी और गरीबी में,
सभी के साथ रिश्ता निभाता हूँ,
पत्थर दिलों को पिघलाता हूँ।
एकत्र किया जाऊँ तो समुद्र का रूप ले सकता हूँ,
खामोश बहता हूँ, समुद्र जैसा मुझमें शोर नहीं,
किन्तु मेरी हर बूंद में भाव छिपा होता है।
 

प्रसव पीड़ा जब होती माँ को,
प्यार बन बरसता हूँ,
आँचल में लेकर नन्हीं सी जान को,
खुशियों से छलकता हूँ।
विदा होती बेटी जब घर से,
त्याग और बलिदान सा मैं बहता हूँ।
 

असहनीय पीड़ा में है अगर कोई,
असहाय बन निर्जीव सा आँखों में रहता हूँ,
अबला नारी की चीखों को सुनकर,
ख़ून बन टपकता हूँ।
मृत शैया पर सोया गर कोई,
वेदना और वियोग में खोया,
बादल सा फट गिरता हूँ,
जी हाँ मैं आँसू हूँ ,हाँ जी मैं आँसू हूँ।

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