यादों का दौर  VIKAS UPAMANYU

यादों का दौर

VIKAS UPAMANYU

जब तुम बात करते हो
अपना सा लगता है ज़माना,
आपकी यादों का दौर
हूँ मैं आपकी आवाज़ का दीवाना।
 

वो आप ही थे
जो समा गए यूँ मेरी यादो में,
महक रही है ज़िन्दगी आपकी खुशबू से,
अब क्या ज़रुरत है,
यूँ डूब जाना इन मयखानों में।
 

जब से मिले हो
तमन्ना हुई जीने कि हमें,
कुछ तो बात है ‘उपमन्यु’
उसकी बातो में,
वरना जीवन कट रहा था
यूँ ही आहों में,
हम भटकते रहते थे
अनजान राहों में।
 

लिख कुछ ऐसा ‘उपमन्यु’
उसकी दोस्ती पर,
जो होना है वो होगा
फिर डरता क्यों है,
मत शक कर उसकी हस्ती पर।

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