ये मौसम कैसे बदल गया  Amrita Pandey

ये मौसम कैसे बदल गया

Amrita Pandey

जब बून्दें बारिश की आईं, पागल मन फिर से मचल गया,
ये मौसम कैसे बदल गया, ये मौसम केैसे बदल गया।
 

तू रहता हरदम बाहों में,
तेरी मंज़िल मेरी राहों में,
दुनिया बेगानी सी थी,
मैं ही थी तेरी आहोंं में,
हाथों से रेत की तरह, ये वक्त कैसे फिसल गया,
ये मौसम कैसे बदल गया, ये मौसम कैसे बदल गया।
 

कैसे सब कुछ मैं वही करूँ,
कैसे बिगड़े को सही करूँँ,
कैसे नित-नित आसूँ पीकर,
हँसती-खिलती मैंं रही करूँ,
क्यों आते-आते पास मेरे, तू ठहर गया, तू संभल गया,
ये मौसम कैसे बदल गया, ये मौसम कैसे बदल गया।
 

जा रूठा है तो रूठा रह,
तू टूटा है तो टूूटा रह,
पर जब भी दिल तेरा तड़पे,
आ पास मेरे ना सूखा रह,
मैं तेरी थी, तेरी ही हूँ, तू ही गैरों में उलझ गया,
ये मौसम कैसे बदल गया, ये मौसम कैसे बदल गया।

अपने विचार साझा करें




1
ने पसंद किया
34
बार देखा गया

पसंद करें


  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 7534072808
Mail : info@maatribhasha.com