नारी का जीवन  Anupama Ravindra Singh Thakur

नारी का जीवन

Anupama Ravindra Singh Thakur

बहुत ही कठिन है नारी का जीवन,
हर एक पग है कंटीला वन,
समाज परिवार सब का है अपना पैमाना,
सभी के अनुसार उसे है चलना।
 

स्वतंत्र होते हुए भी हैं रिश्तों के बंधन,
जहाँ जीती है वह हर दिन
कर अपनी इच्छाओं का शमन,
बहुत ही कठिन है नारी का जीवन।
 

सभी के प्रति त्याग और समर्पण ही है उसका जीवन,
कई वेदनाओं एवं विपत्तियों का करके दमन,
करती है वह अपने परिवार का पालन पोषण,
प्रत्येक दायित्व का करती वह कुशलतापूर्वक वहन,
बहुत ही कठिन है नारी का जीवन।
 

समाज करता रहा उसके अधिकारों का हनन,
चुपचाप खड़ी सहती रही वह हर क्षण,
यह नहीं कि वह अबला है इसलिए साध लिया मौन,
वह दुर्गा है, वह सबला है, है वह शक्ति संपन्न,
आवश्यकता नहीं करे वह अपना शक्ति प्रदर्शन।
 

धैर्य, संयम धारण कर करती है वह क्रोध का शमन,
सही अर्थों में वह जगदंबा है,
इसीलिए है सब में पावन,
बहुत ही कठिन है नारी का जीवन।

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