ज़िन्दगी  VIVEK ROUSHAN

ज़िन्दगी

VIVEK ROUSHAN

उलझनों में रहकर भी
सुलझे रहना ही तो ज़िन्दगी है,
सब कुछ हार कर भ
जीत की कल्पना करना ही तो ज़िन्दगी है।
 

अपनों को खोकर, किसी गैर को
अपना बनाने का प्रयत्न करना
ही तो ज़िन्दगी है,
दिल ज़ख्मों से भरा हो,
पर होंठ सदा मुस्कुराते रहें,
यही खूबसूरत एहसास ही तो ज़िन्दगी है।
 

ख्वाबों के टूट जाने पर, नए ख्वाब देखने
की अभिलाषा रखना ही तो ज़िन्दगी है,
बनते-बिगड़ते हालातों का हिसाब ही तो ज़िन्दगी है।
 

ज़िन्दगी है सदा चलते रहने का नाम,
टूटकर, गिरकर, बिखरकर,
सम्भलना ही तो ज़िन्दगी है।

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