बिटिया दुल्हन बन जाती है  Deeksha Dwivedi

बिटिया दुल्हन बन जाती है

Deeksha Dwivedi

वो सजके लाल जोड़े में जब
बाबुल के सम्मुख आती है,
माँ बाबा सोचें क्यों पल में
बिटिया दुल्हन बन जाती है।
 

कल तक जो घर था उसका
अब मायका वो कहलाएगा,
किसी और के घर की लक्ष्मी
बच्चा मेरा बन जाएगा।
 

कन्या अपनी नियति में क्यों
ये पृष्ठ लिखाकर आती है,
माँ बाबा सोचें क्यों पल में
बिटिया दुल्हन बन जाती है।
 

जो राजकुमारी थी मेरी
कोई और उसे ले जाएगा,
कितने नाजों से पाला है
क्या प्यार वो ये दे पाएगा?
 

जब तक ना सुने लोरी माँ से
नहीं रात में वो सो पाती है,
माँ बाबा सोचें क्यों पल में
बिटिया दुल्हन बन जाती है।
 

भैया बहना की जान है वो
घर का अपने सम्मान है वो,
कन्या कोई दान की चीज़ नहीं
बाबुल का तो अभिमान है वो।
 

होकर विदा एक आँगन से
रोशन घर दूजा कर देती है,
माँ बाबा सोचें क्यों पल में
बिटिया दुल्हन बन जाती है।

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