कर्म  Ashutosh kumar jha

कर्म

Ashutosh kumar jha

कल्पनाओं को छोड़कर
कर्म को अपनाना होगा,
विकृत हो रही मनः स्थिति
पर काबू पाना होगा।
 

बहक रहे हैं सभी के कदम,
फैल रहा जीवन में अंधकार,
खाली समय में अंतःमन
को झकझोरना होगा,
कल्पनाओं को छोड़कर
कर्म को अपनाना होगा।
 

संगत के संस्कारों से
खुद को बचाओ ऐ दोस्त,
बिगड़ती हुई व्यवस्थाओं को
फर्ज से सुधारो ऐ दोस्त,
सबको मूल मंत्र अपनाना होगा,
कल्पनाओं को छोड़कर
कर्म को अपनाना होगा।
 

अलविदा करो बुरे स्वप्न को
अच्छे ख्वाब दिखाओ मन को,
आँखों में बस रहे कुछ सपने
तुम्हारे ही तो हैं,
पवित्र कर्मों से पूरा करना होगा,
कल्पनाओं को छोड़कर
कर्म को अपनाना होगा।

अपने विचार साझा करें




0
ने पसंद किया
94
बार देखा गया

पसंद करें


  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 7534072808
Mail : info@maatribhasha.com