अधूरी याद  RAHUL Chaudhary

अधूरी याद

RAHUL Chaudhary

कोई सँजोए लाख मगर
साथ कोई कितने सफर,
खिलखिलाते डगर
फीके हैं, बिन हमसफ़र।
 

तूफान हैं दफन सीने में
झकझोरने को,
एहसास की हर डोर को।
कैद कितने यादों के चित्र
आ रहे सामने फिर,
रूह छू रहे फिर भूले याद।
 

कदम का रुख मोड़ कर
चल रहे उल्टी दिशा,
अंश तेरे इन फ़िज़ाओं में
कर रही बयाँ तेरे निशां।
 

क्या ज़रूरी इन पलों का
बिन तेरे अब,
क्यों दे रही आवाज़ ये
एक बार फिर, अब तेरे बाद।
 

मौजूदगी तेरी
महसूस है अभी भी,
जाने क्यों
छू कर छिपती अभी भी।
 

मोड़ कर गुज़रा करूँ
रुख गलियों से तेरे,
बेखबर हूँ तुझसे अब
लिए कुछ अधूरी याद।

अपने विचार साझा करें




0
ने पसंद किया
671
बार देखा गया

पसंद करें


  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 7534072808
Mail : info@maatribhasha.com