बप्पा और टीचर  Anupama Ravindra Singh Thakur

बप्पा और टीचर

Anupama Ravindra Singh Thakur

देखना चाहते थे गणपति बप्पा इस बार
बच्चे किन्हें करते हैं ज्यादा प्यार,
शिक्षक हैं महत्वपूर्ण या मेरा त्यौहार।
खुश हो गए बप्पा देखकर
बच्चों का शिक्षकों के प्रति प्यार,
बच्चों से जाकर बप्पा ने किया
एक विचित्र सवाल।
मुझसे ज्यादा क्यों है तुम्हें
अपने टीचर्स से प्यार,
बच्चों ने कहा बप्पा
आए हो तो समझो हमारी परेशानी,
और कर दो ऐसा चमत्कार
आप की तरह ही हो साल में टीचर का दर्शन एक बार।
ना कोई पढ़ाई ना होमवर्क
ना हो शिक्षकों का अत्याचार,
ऐसा कर सकते हो तो बोलो
हम करेंगे टीचर से ज्यादा आपको प्यार।
बप्पा ने सोचा यहाँ से भागने में ही है समझदारी,
किसी टीचर ने सुन लिया तो होगी
मुर्गा बनने की अब मेरी बारी।

अपने विचार साझा करें




0
ने पसंद किया
136
बार देखा गया

पसंद करें


  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 7534072808
Mail : info@maatribhasha.com