मित्रों को समर्पित  Vivek Tariyal

मित्रों को समर्पित

Vivek Tariyal

मित्र के हित जग लुटाना मित्रता का मर्म है,
यही है ईश्वर की पूजा, यही मानव धर्म है।
 

दो अक्षर का शब्द "मित्र", जीवन का बड़ा सहारा है,
साहस है जीवन पथ का, उम्मीदों का उजियारा है।
 

बिना कहे जो समझ जाता मन भीतर के तूफ़ान को,
संयम पाठ पढ़ाकर, शांति देता मनः उफ़ान को।
 

खुशियाँ हो जाती हैं दुगनी, मित्रों के जीवन में होने से,
यश वैभव भी रास न आता उनको जीवन में खोने से।
 

कभी भाई है कभी पिता, कभी वह माँ बन जाता है,
धारण करता रूप अनेक, स्थिति विकट जब पाता है।
 

निस्वार्थ भाव उसमें अदम्य, हर बाधा को चुनौती देता है,
आने वाले संकट को वह निज कन्धों पर लेता है।
 

जीवन समर की राह में वह हमेशा साथ है,
मैं अर्जुन वह कृष्ण है, उसपर मुझे विश्वास है।
 

जब कुटुंब भी साथ न हो, वह प्रेरणा स्रोत है,
उसके अटल विश्वास से, आँधी में जलती ज्योत है।

अपने विचार साझा करें




1
ने पसंद किया
2134
बार देखा गया

पसंद करें


  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 7534072808
Mail : info@maatribhasha.com