फितरत  Anupama Ravindra Singh Thakur

फितरत

Anupama Ravindra Singh Thakur

किसी को इतना भी
मत सताओ
कि छोटी चिंगारी भी
ज्वालामुखी बन जाए।
विस्फोट को रोकना
बस में ना होगा,
अगर कोई
अपनी जलालत पर उतर आए।
जो बरसेंगे अंगारे शोला बनकर,
भरे बाजार में बेआबरू हो जाओगे,
दिल से सभी के उतर जाओगे
मुँह ना होगा कि
फिर से कुछ कह पाओगे।
 

किसी को इतना भी
ना सताओ कि
बेबसी में
केवल बद्दुआ ही निकले,
अगर दुआएँ असर करती हैं
तो बद्दुआओं
में भी ताकत होती है,
इसीलिए तो
पुख्ता मंज़िलों को भी
गिरते देखा है।
 

किसी को इतना भी
ना सताओ कि
आपके लिए सिर्फ
नफरत ही नफरत बचे,
कभी आपको भी
किसी की जरूरत पड़े
और कोई मदद ना मिले,
तब इंसानियत के खोने का
एहसास उस रूह को हो
जो दूसरों को तड़पाने में लगी है।

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