निज भाषा से प्यार करो  B Seshadri "Anand"

निज भाषा से प्यार करो

B Seshadri "Anand"

सब भाषाओं को आदर दो, हाँ सबका सत्कार करो,
पर हिंदी अपनी भाषा है, निज भाषा से प्यार करो।
 

अपने ही घर में दासी के जैसी क्यूँ है हिंदी सोचो,
दफ्तर दफ्तर अपमानित सी, रहती क्यूँ है हिंदी सोचो,
हिन्द वासियों हर भाषा पे, तुम अपना अधिकार करो,
पर हिंदी अपनी भाषा है, निज भाषा से प्यार करो।
 

जब तक परदेशी भाषा के मोह पाश में फँसे रहेंगे,
तब तक पैर हमारे गहरे तक कीचड़ में धँसे रहेंगे,
मैं कब कहता हूँ गैरों की भाषा का प्रतिकार करो,
पर हिंदी अपनी भाषा है, निज भाषा से प्यार करो।
 

हिंद और हिंदी दोनों का आओ ऐसे मान बढ़ाएँ,
छोड़ गुलामी पर भाषा की आओ हिंदी को अपनाएँ,
भले दूसरी भाषाओं पर भी तुम सोच विचार करो,
पर हिंदी अपनी भाषा है, निज भाषा से प्यार करो।
 

व्याख्यानों सेमीनारों से, हिंदी का कुछ भला हुआ क्या,
लगते सरकारी नारों से, हिन्दी का कुछ भला हुआ क्या,
रुपये बंदरबाँट करो या जो चाहे सरकार करो,
पर हिंदी अपनी भाषा है, निज भाषा से प्यार करो।

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