मौन  Anupama Ravindra Singh Thakur

मौन

Anupama Ravindra Singh Thakur

जमाने के रंग ढंग देखकर
सीख लिया मैंने हर गम को
रखना अपने अंदर,
बड़बोले हो अगर
दुनिया मारती है उसे ठोकर,
जीता है जो पेट में छिपाकर
वही माना जाता है यहाँ सिकंदर,
निरंतर उन्नति की ओर
होता है वही अग्रसर।
सीख लिया मैंने
जमाने के रंग ढंग देखकर
दबा लेना सब अपने अंदर।
 

धूर्त और शातिर बनकर
जिए जो केवल दिखावा कर,
कलयुग में उसी को मिलता है आदर।
जिए जो मुस्कुराकर
चाहे मन से मलिन होकर,
छले जो अपनों को
केवल पाने उन्नति के अवसर,
वही बनता है यहाँ श्रेष्ठकर।
सीख लिया है मैंने
जमाने के रंग-ढंग देखकर
दबा लेना सब अपने अंदर,
केवल और केवल मौन रहकर।

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