जागो भारत  Abhishek Pandey

जागो भारत

Abhishek Pandey

भारत माँ के बेटे देखो
पड़े हुए हैं पश्चिम के श्रीचरणों में,
त्याग, शील का मार्ग छोड़,
वो चले गए हैं भोगवाद की शरणों में।
 

जर्जर कुटिया को उजाड़
वे ऊँचे भवन बनाते हैं,
पूँजीपतियों के प्रांगण में
नित अपना शीश झुकाते हैं।
 

स्वजनों के खूनों की होली
खेल गर्वित हो इठलाते हैं,
माँ भारती की मार्मिक आहों पर
वे हर्षित हो इतराते हैं।

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