वो बच्चा !  Manjul Singh

वो बच्चा !

Manjul Singh

लिए हाथ में हैं खड़ा
कटोरा हर चौराहे पर
वो बच्चा !
छूता हर लावारिस चीज को
ताकि खाने को मिल जाए
कुछ कच्चा-पक्का !
तपते बदन के
कूल्हों पर चढ़ा रखा
है, फटा पुराना कच्छा !
छूता पैर सभी के ताकि
कोई दे-दे एक आध
आठ आने का सिक्का!
अगर उसकी ये हालत
ना होती तो क्या वह भी
होता देश का हिस्सा ?
अटल,
अभिमानी,
और सच्चा !
अगर कभी कोई
दे देता उसको
फूटी कौड़ी का सिक्का,
छीन लिया जाता
है उससे उसकी
मेहनत का वो सिक्का !
फिर अगले दिन ना
जाने मिल जाए कहाँ
लिए हाथ में कटोरा लिए खड़ा,
किसी और
चौराहे पर
वो बच्चा !

अपने विचार साझा करें




0
ने पसंद किया
111
बार देखा गया

पसंद करें


  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 7534072808
Mail : info@maatribhasha.com