नंदलाल मुस्कुराते आकाश से  SMITA SINGH

नंदलाल मुस्कुराते आकाश से

SMITA SINGH

समंदर के पानी से भरी पिचकारी,
बिना रंगों के भी प्यार भरे रंगों से भरी पिचकारी,
हँसी, खिलखिलाहट, मज़ाक़ और मस्ती,
दोस्तों ही के संग होली पर रचती।
 

ख़ुशी रूपी बौछार है
होली रंगों में रंग जाने को आतुर,
प्रेमिका के लिए सौग़ात है होली।
 

होली के लज़ीज़ पकवान,
संग साथ खिलाने, खाने का नाम भी होली,
व्यर्थ के गिले शिकवे और मनमुटाव
भुलाने का भी नाम है होली।
 

साल भर इंतेज़ार बाद, रंगों में डूबा सारा शहर,
नाच रहे आज सारे लोग,
चाहे बच्चे, बूढ़े हो या जवान,
ढा रहे ग़ज़ब चलें सभी ख़ुशियों की डगर
आई आज होली की लहर।
 

बुरा ना मानो होली है , कह कर लोग
खिलखिलाते, लगाते अट्टहास,
अचानक रंगों की कर देते बौछार
यही जीवन है जब मिल बैठे मनाएँ त्योहार।
 

परहेज़ रंग से करने वाले लोग भी
सहज दिख रहे लगाते गुलाल,
बुज़ुर्गिन के पैर छूने की परम्परा
रंगीली गली, अबीर गुलाल की वर्षा,
फगुआ माँगते आ जाते मेहमान
बढ़ा देते होली का मान।
 

गीत होली के गूंज रहे हैं ..
ठंडाई की ठंड से, रंगों की बरसात में,
होली मनाते देख, नंदलाल मुस्कुराते आकाश में।

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