नियति के प्रश्न  DEEKSHA RAWAT

नियति के प्रश्न

DEEKSHA RAWAT

इलाही मेरे अंदर, इलाही तेरे अंदर,
फिर ढाँचे का खेद क्यों?
ईश्वर वही अल्लाह वही,
फिर बाहर इतना भेद क्यों?
है प्रश्न थोड़ा जटिल लेकिन
जीवन सबका एक ही।
भेद-खेद के फेर से
मृत्यु सब की एक ही।
नफरतों के बीच ही, प्रेम लौकिक हो सका,
इक बीज ही काफी सही, है जरूर पनपता।
अगणित स्वरों के बीच तू, खुद भीतरी आवाज सुन
है सत्य क्या मिथ्या है क्या, सोचकर खुद ही तू चुन।
हम सरिके आये कई, अर गये कही
यह सिलसिला चलता रहा।
वही गूदा, चमडी वही,
फिर काफिले का प्रश्न क्यों?

अपने विचार साझा करें




0
ने पसंद किया
251
बार देखा गया

पसंद करें

  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 8881813408
Mail : info[at]maatribhasha[dot]com