जान से प्यारा हमें तिरंगा  Bhanu Pratap Singh Tomar

जान से प्यारा हमें तिरंगा

Bhanu Pratap Singh Tomar

जान से प्यारा हमें तिरंगा, ऊँची इसकी शान रहे,
दुनिया का सिरमौर हमेशा, मेरा हिन्दुस्तान रहे,
जय-जय हिन्दुस्तान, जय-जय वीर जवान।
 

योग और विज्ञान की भाषा
दुनिया को सिखलाई थी,
शून्य, दशमलव की गणना भी
हमने ही बतलाई थी,
सदियों पहले सूरज की
दूरी हमने बतला दी थी,
एक कवि तुलसी ने ही
चौपाई में समझा दी थी,
इतनी सी ख्वाहिश है अपना भारत देश महान रहे,
दुनिया का सिरमौर हमेशा, मेरा हिन्दुस्तान रहे,
जय-जय हिन्दुस्तान, जय-जय वीर जवान।
 

अलग-अलग है बोली भाषा
अलग-अलग है रीति यहाँ,
अलग-अलग हों धर्म भले ही
लेकिन सबमें प्रीति यहाँ,
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
सबकी यही कहानी है,
जाति-धर्म मजहब से पहले
हम सब हिंदुस्तानी हैं,
वीर शहीदों की खातिर बस, हर मन में सम्मान रहे,
दुनिया का सिरमौर हमेशा, मेरा हिन्दुस्तान रहे,
जय-जय हिन्दुस्तान, जय-जय वीर जवान।
 

गर्मी, सर्दी और बरसातें
सब ऋतुएँ पाई जाती हैं,
भिन्न-भिन्न किस्मों की यहाँ
फसल उगाई जातीं हैं,
झरनों के कल-कल का यहाँ
संगीत सुनाई देता है,
पाँव पखारे भारत माँ के
सागर दिखलाई देता है,
शान तिरंगे की ना झुकने देंगे, जब तक जान रहे,
दुनिया का सिरमौर हमेशा, मेरा हिन्दुस्तान रहे,
जय-जय हिन्दुस्तान, जय-जय वीर जवान।
 

विवेकानंद का ज्ञान यहाँ है
भगत सिंह की कुर्बानी,
हर नारी में जाग उठी है
अब झाँसी वाली रानी,
वीर शिवाजी का है शौर्य
और राणा का स्वाभिमान यहाँ,
जौहर करती यहाँ नारियाँ
ना बिकता सम्मान यहाँ,
जन्म लिया पावन माटी में, बस इतना अभिमान रहे,
दुनिया का सिरमौर हमेशा, मेरा हिन्दुस्तान रहे,
जय-जय हिन्दुस्तान, जय-जय वीर जवान।

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