भारत का नव गान VIKAS UPAMANYU
भारत का नव गान
VIKAS UPAMANYUभारत की धरती गाए, विकास का नव गान,
जनशक्ति से जगमगाए, हो उज्ज्वल आसमान।
दृढ़ संकल्प से बढ़ें कदम, सेवा बने पहचान,
लोकतंत्र की राह दिखाए, जन-जन का अभिमान।
ओ भारत माँ के लाल, तू जनता का स्वरूप,
सत्य-धर्म का दीपक बन, दे उज्ज्वलता का रूप।
गाँव-गाँव में शिक्षा फैले, हर घर में हो प्रकाश,
किसान का पसीना दमके, बने समृद्धि का आभास।
युवा उठे उमंग लेकर, विज्ञान बने आधार,
भारत माँ की गोदी में, खिले स्वर्णिम संसार।
सैनिक की वीरता बोले, सीमा पर अडिग निशान,
बलिदान की गाथा गाए, भारत का सम्मान।
कल-कारखानों की गूँज में, श्रम का हो आदर,
हुनर से जग को जीते, बने नव निर्माण का स्वर।
नारी शक्ति मुस्काए, बढ़े हर क्षेत्र में नाम,
समानता की राह चले, हो गौरव का संग्राम।
संस्कृति की छाया में, कला का हो विस्तार,
गीत, नृत्य, रागों से गूँजे भारत का संसार।
भारत की धरती गाए, विकास का नव गान,
जनशक्ति से जगमगाए, हो उज्ज्वल आसमान।
