आनंद बख़्शी | मातृभाषा - माँ भारती का श्रृंगार

आनंद बख़्शी

जीवन परिचय

'आनंद बख़्शी', यह वह नाम है जिसके बिना आज तक बनी बहुत बड़ी-बड़ी म्यूज़िकल फ़िल्मों को शायद वह सफलता न मिलती जिनको बनाने वाले आज गर्व करते हैं। आनन्द साहब चंद उन नामी चित्रपट(फ़िल्म) गीतकारों में से एक हैं जिन्होंने एक के बाद एक अनेक और लगातार साल दर साल बहुचर्चित और दिल लुभाने वाले यादगार गीत लिखे, जिनको सुनने वाले आज भी गुनगुनाते हैं, गाते हैं। जो प्रेम गीत उनकी कलम से उतरे उनके बारे में जितना कहा जाये कम है, प्यार ही ऐसा शब्द है जो उनके गीतों को परिभाषित करता है और जब उन्होंने दर्द लिखा तो सुनने वालों की आँखें छलक उठीं दिल भर आया, ऐसे गीतकार थे आनन्द बख़्शी । दोस्ती पर शोले फ़िल्म में लिखा वह गीत 'यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेगे' आज तक कौन नहीं गाता-गुनगुनाता। ज़िन्दगी की तल्खियो को जब शब्द में पिरोया तो हर आदमी की ज़िन्दगी किसी न किसी सिरे से उस गीत से जुड़ गयी। गीत जितने सरल हैं उतनी ही सरलता से हर दिल में उतर जाते हैं, जैसे ख़ुशबू हवा में और चंदन पानी में घुल जाता है। मैं तो यह कहूँगा प्रेम शब्द को शहद से भी मीठा अगर महसूस करना हो तो आनन्द बख़्शी साहब के गीत सुनिये। मजरूह सुल्तानपुरी के साथ-साथ एक आनन्द बख़्शी ही ऐसे गीतकार हैं जिन्होने 43 वर्षों तक लगातार एक के बाद एक सुन्दर और कृत्रिमता (बनावट) से परे मनमोहक गीत लिखे, जब तक उनके तन में साँस का एक भी टुकड़ा बाक़ी रहा।

लेखन शैली

बख्शी साहब ने फ़िल्म मोम की 'गुड़िया(1972)' में गीत 'बाग़ों में बहार आयी' लता जी के साथ गाया था। इस पर लता जी बताती हैं कि 'मुझे याद है कि इस गीत की रिकार्डिंग से पहले आनन्द मुझसे मिलने आये और कहा कि मैं यह गीत तुम्हारे साथ गाने जा रहा हूँ 'इसकी सफलता तो सुनिश्चित है'। इसके अलावा 'शोले(1975)', 'महाचोर(1976)', 'चरस(1976)', 'विधाता(1982)' और 'जान(1996)' में भी पाश्र्व(प्लेबैक) गायक रहे। आनन्द साहब का फिल्म जगत में योगदान यहीं तक सीमित नहीं, 'शहंशाह(1988)', 'प्रेम प्रतिज्ञा(1989)', 'मैं खिलाड़ी तू आनाड़ी(1994)', और 'आरज़ू(1999)' में बतौर एक्शन डायरेक्टर भी काम किया, सिर्फ यही नहीं 'पिकनिक(1966)' में अदाकारी भी की।

बख्शी जी के गीतों की महानता इस बात में है कि वह जो गीत लिखते थे वह किसी गाँव के किसान और शहर में रहने वाले किसी बुद्धिजीवी और ऊँची सोच रखने वाले व्यक्तिव को समान रूप से समझ आते हैं। वह कुछ ऐसे चुनिंदा गीतकारों में से एक हैं जिनके गीत जैसे उन्होंने लिखकर दिये वह बिना किसी फेर-बदल या नुक्ताचीनी के रिकार्ड किये गये। आनन्द साहब कहते थे फिल्म के गीत उसकी कथा, पटकथा और परिस्थिति पर निर्भर करते हैं। गीत किसी भी मन: स्थिति, परिवेश या उम्र के लिए हो सकता है सो कहानी चाहे 60, 70 या आज के दशक की हो इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है।

प्रमुख कृतियाँ
क्रम संख्या कविता का नाम रस लिंक
1

आप का खत मिला आप का शुक्रिया

शृंगार रस
2

हम तुम युग युग से ये गीत मिलन का

शृंगार रस
3

आज उनसे पहली मुलाक़ात होगी

शृंगार रस
4

हुस्न के लाखों रंग

शृंगार रस
5

आने से उसके आये बहार

शृंगार रस
6

अँखियों को रहने दो

शृंगार रस
7

आज मौसम बड़ा बेईमान है

शृंगार रस
8

आदमी मुसाफ़िर है

शृंगार रस
9

अब के सजन सावन में 

शृंगार रस
10

आते जाते खूबसूरत आवारा सड़कों पे

शृंगार रस
11

हवा के साथ साथ

शृंगार रस
12

आएगी आएगी आएगी किसी को

शृंगार रस
13

आदमी जो सुनता है, आदमी जो कहता है

अद्भुत रस
14

आ जा तुझको पुकारें मेरे गीत रे

शृंगार रस

  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 7534072808
Mail : info@maatribhasha.com