हिंदू - मुस्लिम  बिजेंद्र दलपति

हिंदू - मुस्लिम

बिजेंद्र दलपति

हिंदू मुस्लिम क्यों करता है
इतनी क्या रुसवाई है,
नफरत का चश्मा उतार कर
देख वो तेरा भाई है।
 

कोई कहे हिंदू बुरा है
कोई कहे बुरा मुसलमान,
अपनी बुराइयाँ निकाल के देख
सच्चा लगेगा हर इंसान।
 

ये चाल थी उन रसूखदारों की
हमें आपस में बाँटने की,
नफरत का बीज दिल में बो कर
बँटवारे की फसल काटने की।
 

तू फँस ही गया उनकी चाल में
और कठपुतली सा नाचता है,
उनके मंसूबों को समझता नहीं
और नफरत का गीत गाता है।
 

तू क्यों ना समझे ये भारत है
प्यार की एक पावन धरती,
यहाँ मस्जिद में अजान चले
जब मंदिरों में होती आरती।
 

ये देश है हम सबका भाई
आओ मिलके अपने दुश्मन से लड़ें,
क़दम मिलाकर साथ चलकर
प्रगती पथ पर आगे बढ़ें।

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