नारी तेरी यही कहानी  Ravindra Kumar Soni


नारी तेरी यही कहानी

Ravindra Kumar Soni

खुद के महल को छोड़ तूने औरों के घर को सजाया,
उस युग मे सीता बन, इन युग ने "निर्भया" बनाया।
कहीं पर पन्नाधाय बन, देश प्रेम का सबक सिखाया,
तो कहीं पर प्रेम सागर दिखलाने हो गई मीरा दीवानी,
नारी तेरी यही कहानी।
 

जो तुझ पर क्रूर हुए थे, मर गया उनकी आँख का पानी,
तुझे लज्जित हर बार कर, शर्मसार हुई उनकी जवानी।
कभी पद्मावती बनाकर , "आसिफा" पर दोहराई कहानी,
सभी ने शांत स्वरूप को रौंदा, बन जा फिर से भवानी,
नारी तेरी यही कहनी।
 

रौंद सभी ने अपनी मर्यादा, सदा तुझे घूँघट में बाँधा,
जननी, बहन, संगिनी बनकर, निभा रही तू अपना वादा।
सभी रिश्तों से बँधकर भी, सदा रही वीरानी,
हर युग मे तेरी चीखें हर युग में तेरी निशानी,
नारी तेरी यही कहानी।

अपने विचार साझा करें




0
ने पसंद किया
47
बार देखा गया

पसंद करें


  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 7534072808
Mail : info@maatribhasha.com