मेरी यादों की गुल्लक  DEVENDRA PRATAP VERMA

मेरी यादों की गुल्लक

DEVENDRA PRATAP VERMA

ठहर जाओ चाँद तारों
ठहर जाओ रात,
ठहर जाओ साजन
अभी देर है बहुत
होने में प्रात।
 

कर लेने दो मुझे
मेरे हिस्से का श्रम,
जानती हूँ नहीं है
और कोई उपक्रम,
वक़्त की इक-इक पाई
कमाने दो,
कतरा कतरा सहेज कर
लाने दो,
हमारे साथ गुज़रे
खूबसूरत लम्हों के
सिक्कों से भर जाने दो।
अभी खाली है
जानते हो न,
अभी खाली है
मेरी यादों,जज्बातों
एहसासों की गुल्लक,
जो बहुत काम आएगी
तुम्हारे
मेरे साजन
मेरे जाने के बाद।
 

जब कभी तुम होगे
बहुत खाली बहुत उदास,
मेरे स्पर्श, मेरी संवेदना,
मेरे एहसास को
ढूँढ़ते,
ख्वाबों के जंगल
में थके टूटे हारे,
चाँद तारों को निहारते,
प्रात का पंथ बुहारे,
नहीं पाओगे मुझे
कहीं भी
जब कभी,
तो फोड़ लेना मेरी
यादों की ये गुल्लक।
 

इसमें जमा
लम्हों के सिक्कों से
तुम ज़रूर
खरीद पाओगे,
वक़्त के बाज़ार से
मेरी हसीन झिलमिलाती
मुस्कुराती यादें,
जो भर देंगी
तुम्हारी उदासी,
तुम्हारे खालीपन को
सुकून से, उमंग से,
आनंद से।
 

मैं जानती हूँ
मेरी यादों, जज्बातों,
एहसासों की गुल्लक
बहुत काम आएगी
तुम्हारे
मेरे साजन,
मेरे जाने के बाद।

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