लक्ष्मी,दुर्गा और सरस्वती  सलिल सरोज

लक्ष्मी,दुर्गा और सरस्वती

सलिल सरोज

मेरे पड़ोस में,
और शायद हर पड़ोस में-
एक लक्ष्मी, दुर्गा और सरस्वती रहती है।
 

मेरे पड़ोस की लक्ष्मी
के जन्मते ही,
उसके बापू की
सारी उम्मीदें मर गईं।
उसके बापू ने उसकी माँ से कहा-
तूने बच्चा नहीं "बोझ" जना है,
तुझे पता नहीं लड़की जनना मना है;
लेकर कुछ तो आई नहीं,
पर सब कुछ लेकर जाएगी।
 

मेरे पड़ोस की दुर्गा
जब चौदह साल की हुई,
तो "समाज" ने कहा-
इसकी शादी कर दो,
वरना लड़का नहीं मिलेगा।
सबने उसे दुल्हन बना कर,
आग के सामने बिठा दिया,
किन्तु दहेज़ न मिलने पर,
उसी आग में उसे जला दिया।
 

मेरे पड़ोस की सरस्वती
शादी करके ऐसे प्रदेश गयी:
जहाँ "भोजन, पानी" के साथ,
लड़कियों की भी क़िल्लत है।
अब वो अपने किस्मत को रोती है,
पर "द्रौपदी" बनकर हर रात,
घर के पाँच "मर्दों" के साथ सोती है।
 

पर फिर मेरे पड़ोस वाले,
क्यों कहते हैं कि
हमारे देश-समाज में,
लक्ष्मी, दुर्गा और सरस्वती "देवी" हैं।

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