अधूरे ख्वाबों का गीत  Shubham Amar Pandey

अधूरे ख्वाबों का गीत

Shubham Amar Pandey

आँख तेरी सजल हो गई क्यों प्रिय
विरह तो प्रेम का दूसरा नाम है,
प्रीति की रीति को अमरता मिले
कृष्ण संग राधिका का यही धाम है।
आँख तेरी सजल .............
 

वक्त के पृष्ठ पर कल्पना की कलम
हम चलाते रहे चित्र बनते गए,
मेरे शब्दों को अधरों पे धरकर प्रिय
तुमने आवाज़ दी गीत में ढल गए।
ख़्वाब था कि हो गीतों की लय ज़िन्दगी
छंद अधूरा ही गाना मेरे भाग्य है
आँख तेरी सजल .............
 

सोचते थे डगर है ये सीधी सरल
किंतु अवरोध इस पर कोई कम नहीं,
यूँ परिंदों सा उड़ने का देखा सपन
अपने हिस्से था कोई गगन ही नहीं।
चाहा था फूल ने संग तितली रहे
किंतु काँटों पर ही उसका अधिकार है
आँख तेरी सजल .............
 

अनगिनत रात जब देखकर चांद को
मेरी आँखों में प्रतिबिंब तुम्हारा दिखा,
साथ अपना जो देखे थे ख़्वाबों में हम
ज्यों सवेरा हुआ वो विदा हो गया।
मोतियों की तरह पल संजोए थे पर
टूटी माला बची अब मेरे हाथ है
आँख तेरी सजल .............

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