काव्यशाला - श्रृंगार रस की कविताएं

हिंदी साहित्य के श्रृंगार रस की कालजयी कविताओं का संकलन





मैं तुम्हें ढूंढने स्वर्ग के द्वार तक

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 4612  0

तुम बिन नैण दुखारा 

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 5185  0

सूनी साँझ

शिवमंगल सिंह 'सुमन'

शृंगार रस | आधुनिक काल

 3223  0

हुस्न के लाखों रंग

आनंद बख़्शी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2931  0

नैना निपट बंकट छबि अटके

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 3223  0

तुम रत्न-दीप की रूप-शिखा

नरेन्द्र शर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 3259  0

झहरि झहरि झीनी बूँद है परति मानों

देव

शृंगार रस | रीतिकाल

 2029  0

क्षण भर को क्यों प्यार किया था?

हरिवंश राय बच्चन

शृंगार रस | आधुनिक काल

 3583  0

उड़ि गुलाल घूँघर भई

महाकवि बिहारीलाल

शृंगार रस | रीतिकाल

 2421  0

बिहारी के दोहे

महाकवि बिहारीलाल

शृंगार रस | रीतिकाल

 3211  0

पारदर्शी नील जल में

नामवर सिंह

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1826  0

जब भी मुँह ढक लेता हूँ

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2811  0

ओप भरी कंचुकी उरोजन पर ताने कसी, 

पद्माकर

शृंगार रस | रीतिकाल

 2209  0

कै रति रँग थकी थिर ह्वै

पद्माकर

शृंगार रस | रीतिकाल

 1911  0

साध

सुभद्राकुमारी चौहान

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2612  0

प्रिय चिरंतन है सजनि

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1991  0

तुम्हारे चरण

धर्मवीर भारती

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2007  0

हरि तुम हरो जन की भीर

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 3217  0

मधुर-मधुर मेरे दीपक जल

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 3035  0

जब मैं तुम्हारी दया अंगीकार करता हूँ

रघुवीर सहाय

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1768  0

मै ना भूलूँगा

संतोषानन्द

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2278  0

आने से उसके आये बहार

आनंद बख़्शी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2026  0

घूमें घनश्याम स्यामा-दामिनी लगाए अंक

गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1456  0

उदास तुम

धर्मवीर भारती

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1891  0

अभी न जाओ प्राण

गोपालदास ‘नीरज’

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2165  0

हरि तुम हरो जन की भीर

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2649  0

अँखियों को रहने दो

आनंद बख़्शी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1799  0

मेरे गीत, तुम्हारा स्वर हो

गुलाब खंडेलवाल

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1988  0

आ रहे तुम बन कर मधुमास

गोपाल सिंह नेपाली

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1880  0

हार गया तन-मन पुकार कर तुम्हें

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2571  0



  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 8881813408
Mail : info[at]maatribhasha[dot]com