काव्यशाला - श्रृंगार रस की कविताएं

हिंदी साहित्य के श्रृंगार रस की कालजयी कविताओं का संकलन





भाव भगति है जाकें

सूरदास

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2473  0

अब के सजन सावन में 

आनंद बख़्शी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1825  0

नई उमरिया प्यासी है

बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1905  0

हाय-हाय ये मज़बूरी

संतोषानन्द

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1780  0

मौसम के गाँव 

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2201  0

मधु के दिन मेरे गए बीत

नरेन्द्र शर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1614  0

मोरे ललन

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2089  0

दूसरो न कोई

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2221  0

उनकी ख़ैरो-ख़बर नहीं मिलती

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1768  0

हो झालौ दे छे रसिया

महाकवि बिहारीलाल

शृंगार रस | रीतिकाल

 1663  0

कुछ बन जाते हैं

उदय प्रकाश

शृंगार रस | आधुनिक काल

 640  0

न आने की आहट

गुलज़ार

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1743  0

अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार

गोपालदास ‘नीरज’

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1879  0

ग्रीषम प्रचंड घाम चंडकर मंडल तें

देव

शृंगार रस | रीतिकाल

 1527  0

बसो मोरे नैनन में नंदलाल

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2182  0

इन हसीन वादियों से 

संतोषानन्द

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1622  0

मैं तो झोंका हूँ

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2189  0

उर तिमिरमय घर तिमिरमय

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1545  0

भिक्षा

बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1626  0

नयनों के डोरे लाल-गुलाल भरे

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1868  0

आरस सोँ रस सोँ

पद्माकर

शृंगार रस | रीतिकाल

 1380  0

वे मधु दिन

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1620  0

कुँजन के कोरे मनु केलिरस बोरे लाल

देव

शृंगार रस | रीतिकाल

 1503  0

हे री मैं तो प्रेम-दिवानी

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2026  0

श्रंगार-सोरठा

रहीम

शृंगार रस | भक्तिकाल

 1931  0

पूछता क्यों शेष कितनी रात

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

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अपनी भीगी हुई पलकों पे सजा लो मुझको

नक्श लायलपुरी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1707  0

जानत नहिं लगि मैं

महाकवि बिहारीलाल

शृंगार रस | रीतिकाल

 1583  0

प्रभु जी तुम दर्शन बिन

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2087  0

बरसै बदरिया सावन की

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2002  0



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