काव्यशाला - श्रृंगार रस की कविताएं

हिंदी साहित्य के श्रृंगार रस की कालजयी कविताओं का संकलन





भाव भगति है जाकें

सूरदास

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2435  0

अब के सजन सावन में 

आनंद बख़्शी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1786  0

नई उमरिया प्यासी है

बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1868  0

हाय-हाय ये मज़बूरी

संतोषानन्द

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1755  0

मौसम के गाँव 

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2140  0

मधु के दिन मेरे गए बीत

नरेन्द्र शर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1570  0

मोरे ललन

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2046  0

दूसरो न कोई

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2193  0

उनकी ख़ैरो-ख़बर नहीं मिलती

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1749  0

हो झालौ दे छे रसिया

महाकवि बिहारीलाल

शृंगार रस | रीतिकाल

 1628  0

कुछ बन जाते हैं

उदय प्रकाश

शृंगार रस | आधुनिक काल

 604  0

न आने की आहट

गुलज़ार

शृंगार रस | आधुनिक काल

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अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार

गोपालदास ‘नीरज’

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1843  0

ग्रीषम प्रचंड घाम चंडकर मंडल तें

देव

शृंगार रस | रीतिकाल

 1505  0

बसो मोरे नैनन में नंदलाल

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2133  0

इन हसीन वादियों से 

संतोषानन्द

शृंगार रस | आधुनिक काल

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मैं तो झोंका हूँ

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

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उर तिमिरमय घर तिमिरमय

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1505  0

भिक्षा

बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1572  0

नयनों के डोरे लाल-गुलाल भरे

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1811  0

आरस सोँ रस सोँ

पद्माकर

शृंगार रस | रीतिकाल

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वे मधु दिन

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1592  0

कुँजन के कोरे मनु केलिरस बोरे लाल

देव

शृंगार रस | रीतिकाल

 1481  0

हे री मैं तो प्रेम-दिवानी

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

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श्रंगार-सोरठा

रहीम

शृंगार रस | भक्तिकाल

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पूछता क्यों शेष कितनी रात

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

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अपनी भीगी हुई पलकों पे सजा लो मुझको

नक्श लायलपुरी

शृंगार रस | आधुनिक काल

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जानत नहिं लगि मैं

महाकवि बिहारीलाल

शृंगार रस | रीतिकाल

 1547  0

प्रभु जी तुम दर्शन बिन

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

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बरसै बदरिया सावन की

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

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