काव्यशाला - श्रृंगार रस की कविताएं

हिंदी साहित्य के श्रृंगार रस की कालजयी कविताओं का संकलन





कुन्दन से अँग नवयौवन सुरँग उतै

देव

शृंगार रस | रीतिकाल

 1525  0

कभी जब याद आ जाते

नामवर सिंह

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2047  0

जिसकी धुन पर दुनिया नाचे

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2328  0

रूप अनूप दई बिधि तोहि तो

ठाकुर

शृंगार रस | रीतिकाल

 1638  0

मेरी क़िस्मत में तू नहीं शायद

संतोषानन्द

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1812  0

प्रीतो

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1820  0

फटा ट्वीड का नया कोट

नरेन्द्र शर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1267  0

उसके पहलू से लग के चलते हैं

जॉन एलिया

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1665  0

मैं पीड़ा का राजकुँवर हूँ

गोपालदास ‘नीरज’

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1682  0

रंग दुनिया ने दिखाया है निराला, देखूँ

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1679  0

आते जाते खूबसूरत आवारा सड़कों पे

आनंद बख़्शी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1715  0

घाँघरो घनेरो लाँबी लटैँ लटे लाँक पर

देव

शृंगार रस | रीतिकाल

 1441  0

म्हारो अरजी

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 1945  0

कल नाहिं पड़त जिस

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 1618  0

बाँसुरी चली आओ

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1699  0

हवा के साथ साथ

आनंद बख़्शी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1473  0

केसरि से बरन

महाकवि बिहारीलाल

शृंगार रस | रीतिकाल

 1575  0

पग घूँघरू बाँध मीरा नाची रे

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2159  0

मैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँ

गोपाल सिंह नेपाली

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1669  0

दो गुलाब के फूल

गोपालदास ‘नीरज’

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1869  0

कौन तुम मेरे हृदय में

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1910  0

मदनाष्टक

रहीम

शृंगार रस | भक्तिकाल

 1802  0

क्या पूजन क्या अर्चन रे

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1579  0

अमर स्पर्श

सुमित्रानंदन पंत

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1683  0

हेरी म्हा दरद दिवाणौ

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 1637  0

गोरी गरबीली उठी ऊँघत चकात गात

देव

शृंगार रस | रीतिकाल

 1469  0

दूखण लागे नैन

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 1705  0

महफ़िल महफ़िल

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1786  0

शिशिर-पथिक

रामचंद्र शुक्ल

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1512  0

मैं अकेला और पानी बरसता है

शिवमंगल सिंह 'सुमन'

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1804  0



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