काव्यशाला - श्रृंगार रस की कविताएं

हिंदी साहित्य के श्रृंगार रस की कालजयी कविताओं का संकलन





आज मौसम बड़ा बेईमान है

आनंद बख़्शी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2384  0

आदमी मुसाफ़िर है

आनंद बख़्शी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2126  0

जासों प्रीति ताहि निठुराई

घनानंद

शृंगार रस | रीतिकाल

 1997  0

नागमती वियोग खंड 

मलिक मोहम्मद जायसी

शृंगार रस | भक्तिकाल

 3261  0

मोहिबो निछोहिबो सनेह में तो नयो नाहिं

रहीम

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2120  0

पावस रितु बृन्दावनकी

महाकवि बिहारीलाल

शृंगार रस | रीतिकाल

 2051  0

लोक-लाज तजि नाची

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2787  0

उलझी हुई रातें मिलीं

सोम ठाकुर

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2192  0

माहि सरोवर सौरभ लै

महाकवि बिहारीलाल

शृंगार रस | रीतिकाल

 1719  0

पत्र तुम्हारे नाम

सोम ठाकुर

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2143  0

रतनारी हो थारी आँखड़ियाँ

महाकवि बिहारीलाल

शृंगार रस | रीतिकाल

 1932  0

फूले आसपास कास विमल

श्रीपति

शृंगार रस | रीतिकाल

 1775  0

आज मदहोश हुआ जाए रे

गोपालदास ‘नीरज’

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1937  0

राखौ कृपा निधान

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2512  0

पिया चली फगनौटी

रांगेय राघव

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1575  0

मेरे नयना भये चकोर

भारतेंदु हरिश्चंद्र

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1942  0

पथ देख बिता दी रैन

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1878  0

सजनि कौन तम में परिचित सा

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1706  0

मधुपुर के घनश्याम अगर

गोपालदास ‘नीरज’

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1736  0

शलभ मैं शपमय वर हूँ

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1629  0

घन गरजे

बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1636  0

मैं बैरागण हूंगी

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2400  0

तुम्हें मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2453  0

प्रीति करि काहु सुख न लह्यो

सूरदास

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2926  0

बिरहानल दाह दहै तन ताप

महाकवि बिहारीलाल

शृंगार रस | रीतिकाल

 1657  0

साजन! होली आई है!

फणीश्वर नाथ रेणु

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1742  0

चाह भरो चंचल हमारो चित्त

पद्माकर

शृंगार रस | रीतिकाल

 1786  0

चारु चंद्र की चंचल किरणें

मैथिलीशरण गुप्त

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2883  0

एक आँसू गिरा सोचते-सोचते

नक्श लायलपुरी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1954  0

सारा बदन हयात की ख़ुशबू से भर गया

आलोक श्रीवास्तव

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1894  0



  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 8881813408
Mail : info[at]maatribhasha[dot]com